बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को टीआरपी मामले में कहा, अगर मुंबई पुलिस फर्जी टेलिविजन रेटिंग प्वाइंट (टीआरपी) से जुड़े मामले में पत्रकार अर्णब गोस्वामी को पूछताछ के लिए बुलाना चाहती है, तो वह पहले उन्हें समन जारी करे, जैसे अन्य आरोपियों को किया गया है। इसके बाद गोस्वामी पुलिस के सामने उपस्थित हों और जांच में सहयोग करें। कोर्ट ने कहा, सिर्फ दोषरोपण करना सही नहीं।



मुंबई पुलिस को दिए अब तक हुई जांच सील बंद लिफाफे में पेश करने के निर्देश



जस्टिस एसएस शिंदे व जस्टिस एमएस कर्णिक की खंडपीठ ने कहा, एफआईआर इनसाइक्लोपीडिया नहीं है। हम देखना चाहते हैं कि अब तक क्या जांच हुई। इस लिए 5 नवंबर को अगली सुनवाई तक पुलिस एक सील बंद लिफाफे में अब तक हुई जांच की जानकारी पेश करे।



पीठ रिपब्लिक टीवी का स्वामित्व रखने वाली एआरजी ऑउटलाइनर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और अर्नब गोस्वामी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें 6 अक्तूबर को दर्ज हुई एफआईआर को खारिज करने और मामले को सीबीआई के पास स्थानांतरित करने की अपील की गई थी।



याचिका में दलील दी गई कि इस मामले का असर पूरे देश पर होगा इस लिए सीबीआई से इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। याचिका में हाईकोर्ट से मुंबई पुलिस की जांच पर रोक लगाने और पुलिस को याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की गई है।



पुलिस की एफआईआर आधारहीन: साल्वे



एआरजी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीष साल्वे ने कहा, पुलिस की एफआईआर आधारहीन है। इसलिए मेरे मुवक्किल (गोस्वामी) को गिरफ्तारी से राहत दी जाए। पुलिस मेरे मुवक्किल को निशाना बना रही है। आशंका है कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार भी कर सकती है। वहीं, राज्य सरकार के वकील कपिल सिब्बल ने कहा, इस मामले में आरोपी के रूप में अर्णब गोस्वामी का नाम नहीं है।



ऐसे में उन्हें गिरफ्तारी से राहत देने का प्रश्न ही नहीं पैदा होता है। अब तक पुलिस ने आठ आरोपियों को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है। इन दलीलों को सुनने के बाद खंडपीठ ने अर्नब की गिरफ्तारी को लेकर कोई निर्देश जारी करने से मना कर दिया।



मुंबई पुलिस आयुक्त की प्रेस कांफ्रेस पर भी सवाल



खंडपीठ ने मुंबई पुलिस आयुक्त परमवीर सिंह के प्रेस कांफ्रेंस करने पर भी सवाल उठाए। खंडपीठ ने कहा, हम नहीं जानते है कि ऐसे संवेदनशील मामले को लेकर प्रेस में इंटरव्यू देना कितना उचित है। क्योंकि अभी मामले की जांच चल रही है। हमने देखा है पुलिस मामले की जांच जारी होने के बावजूद मीडिया को सूचनाएं देती है।



पुलिस से यह अपेक्षित नहीं है। इस पर सिब्बल ने खंडपीठ को आश्वस्त किया कि आगे से इस मामले को लेकर पुलिस मीडिया से बातचीत नहीं करेगी। लेकिन याचिकाकर्ता को भी चाहिए कि वे पुलिस की छवि को धूमिल नहीं करे। खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 5 नवंबर 2020 तक के लिए स्थगित कर दी है।



राज्य सरकार ने कबूला कि चैनल का नाम एफआईआर में नहीं: रिपब्लिक टीवी



रिपब्लिक टीवी ने बयान जारी कर कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट में खुद कबूल किया है कि टीआरपी मामले की एफआईआर में चैनल का नाम नहीं है। चैनल ने कहा कि हमारी कानूनी सलाहकार की टीम मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ मानहानी का मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया में हैं।



इसके अलावा रिपब्लिक टीवी ने कहा, हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद एफआईआर की कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त सुधीर जम्बावड़ेकर के खिलाफ अवमानना मामले में कार्रवाई की याचिका दाखिल की जाएगी।







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