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वैश्विक महामारी कोरोना संकट से सर्वाधिक प्रभावित महाराष्ट्र सरकार की शराब की विक्री से रिकार्ड कमाई हुई है। कोरोना संकट ने सरकार की तिजोरी पर विपरीत असर डाला है लेकिन लॉकडाउन के दौरान हुई शराब की बिक्री से सरकार की तिजोरी में 3842.32 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। इससे सरकार के राजस्व में काफी इजाफा हुआ है। राज्य उत्पादन शुल्क आयुक्त कांतीलाल उमप ने बताया कि कोरोना संकट के कारण शारब की दुकानें बंद थी।
लेकिन three मई 2020 से शराब बिक्री की अनुमति प्रदान कर दी गई थी। उसके बाद 15 मई से होम डिलीवरी की अनुमति दी गई। धीरे-धीरे शराब की दुकानों को भी खोल दिया गया। राज्य उत्पादन शुल्क विभाग ने साल 2020-21 में 19 हजार 225 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा है। अप्रैल से अगस्त के बीच यानी पांच महीनों में उत्पाद शुल्क विभाग को शराब की विक्री से 3842.32 करोड़ रुपये मिले हैं। जो कि पिछले साल की तुलना में 37 फीसदी कम है।
आबकारी विभाग के अनुसार पिछले पांच महीने में देशी शराब की 9.40 करोड़ लीटर, विदेशी शराब 5.88 करोड़ लीटर, बियर 5.23 करोड़ लीटर व वाइन 17.62 लाख लीटर बिकी है। हालांकि यह आकड़ा पिछले साल की तुलना में कम है। गत वर्ष की तुलना में इस बार देशी शराब में 38 फीसदी, विदेशी शराब 33 फीसदी, बीयर में 63 फीसदी व वाइन में 39 फीसदी की कमी आई है। गौरतलब है कि कोरोना प्रकोप के चलते उद्योग धंधे पूरी तरह से बंद थे। सरकार की तिजोरी खाली पड़ी थी।
डेढ़ लाख लोगों ने मांगा शराब पीने का लाइसेंस
राज्य उत्पादन शुल्क विभाग के अनुसार 01 अप्रैल से 18 सितंबर 2020 के बीच शराब के सेवन के लाइसेंस के लिए 1,56,085 लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया। इसमें से 1,50,955 आवेदनों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही नियमों के उल्लंघन को लेकर 01 अप्रैल से 21 सितंबर 2020 के बीच 18587 मामले दर्ज किए गए। जबकि 10 हजार 109 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस बीच 1718 वाहन व 42.76 करोड़ रुपये की शराब जब्त की गई। गौरतलब है कि कोरोना प्रकोप के चलते उद्योग धंधे पूरी तरह से बंद थे। सरकार की तिजोरी खाली पड़ी थी।
सार
आबकारी विभाग के अनुसार पिछले पांच महीने में देशी शराब की 9.40 करोड़ लीटर, विदेशी शराब 5.88 करोड़ लीटर, बियर 5.23 करोड़ लीटर व वाइन 17.62 लाख लीटर बिकी है…
विस्तार
वैश्विक महामारी कोरोना संकट से सर्वाधिक प्रभावित महाराष्ट्र सरकार की शराब की विक्री से रिकार्ड कमाई हुई है। कोरोना संकट ने सरकार की तिजोरी पर विपरीत असर डाला है लेकिन लॉकडाउन के दौरान हुई शराब की बिक्री से सरकार की तिजोरी में 3842.32 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। इससे सरकार के राजस्व में काफी इजाफा हुआ है। राज्य उत्पादन शुल्क आयुक्त कांतीलाल उमप ने बताया कि कोरोना संकट के कारण शारब की दुकानें बंद थी।
लेकिन three मई 2020 से शराब बिक्री की अनुमति प्रदान कर दी गई थी। उसके बाद 15 मई से होम डिलीवरी की अनुमति दी गई। धीरे-धीरे शराब की दुकानों को भी खोल दिया गया। राज्य उत्पादन शुल्क विभाग ने साल 2020-21 में 19 हजार 225 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा है। अप्रैल से अगस्त के बीच यानी पांच महीनों में उत्पाद शुल्क विभाग को शराब की विक्री से 3842.32 करोड़ रुपये मिले हैं। जो कि पिछले साल की तुलना में 37 फीसदी कम है।
आबकारी विभाग के अनुसार पिछले पांच महीने में देशी शराब की 9.40 करोड़ लीटर, विदेशी शराब 5.88 करोड़ लीटर, बियर 5.23 करोड़ लीटर व वाइन 17.62 लाख लीटर बिकी है। हालांकि यह आकड़ा पिछले साल की तुलना में कम है। गत वर्ष की तुलना में इस बार देशी शराब में 38 फीसदी, विदेशी शराब 33 फीसदी, बीयर में 63 फीसदी व वाइन में 39 फीसदी की कमी आई है। गौरतलब है कि कोरोना प्रकोप के चलते उद्योग धंधे पूरी तरह से बंद थे। सरकार की तिजोरी खाली पड़ी थी।
डेढ़ लाख लोगों ने मांगा शराब पीने का लाइसेंस
राज्य उत्पादन शुल्क विभाग के अनुसार 01 अप्रैल से 18 सितंबर 2020 के बीच शराब के सेवन के लाइसेंस के लिए 1,56,085 लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया। इसमें से 1,50,955 आवेदनों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही नियमों के उल्लंघन को लेकर 01 अप्रैल से 21 सितंबर 2020 के बीच 18587 मामले दर्ज किए गए। जबकि 10 हजार 109 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस बीच 1718 वाहन व 42.76 करोड़ रुपये की शराब जब्त की गई। गौरतलब है कि कोरोना प्रकोप के चलते उद्योग धंधे पूरी तरह से बंद थे। सरकार की तिजोरी खाली पड़ी थी।
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