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मुंबई के पश्चिमी उपनगर स्थित आरे के जंगल से स्थानांतरित कर कांजुरमार्ग में मेट्रो रेल कारशेड बनाने की उद्धव ठाकरे सरकार की परियोजना पर ग्रहण लगता दिख रहा है। इसमें नया पेच यह है कि केंद्र सरकार ने कारशेड की जमीन पर अपना दावा ठोक दिया है और उसपर अपना बोर्ड लगा दिया है। इससे ठाकरे सरकार मेट्रो कारशेड के मुद्दे पर घिरती नजर आ रही है। वहीं, मेट्रो कारशेड को लेकर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार आमने-सामने आ गए हैं।



मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के फैसले को पलट कर कांजुरमार्ग में मेट्रो कारशेड बनाने की शुरुआत की है। राज्य सरकार कह रही है कि कारशेड के लिए जो जमीन उपलब्ध कराई जा रही है वह पूरी तरह से मुफ्त है। लेकिन अब पता चला है कि इस जमीन का मालिकाना हक केंद्र का है।



केंद्रीय उद्योग व आंतरिक व्यापार संवर्धन मंत्रालय (डीपीआईआईटी) ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव संजय कुमार को पत्र भेजकर कहा है कि यह नमक की जमीन है और इस पर अब भी मालिकाना हक भारत सरकार का है। इससे पहले मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने इस जमीन पर परियोजना के लिए प्रस्ताव भेजा था जिसे खारिज कर दिया गया था। अब यहां कारशेड बनाया जा रहा है जो गलत है।



ऐसे में सवाल उठता है कि बिना दस्तावेजों की जांच-पड़ताल किए ठाकरे सरकार ने मेट्रो कारशेड को आरे से उठाकर कांजुरमार्ग में शिफ्ट करने का फैसला कैसे कर लिया। जबकि उद्धव ठाकरे सरकार द्वारा मेट्रो कारशेड के स्थान परिवर्तन को लेकर गठित समिति ने भी आरे में ही कारशेड बनाने का सुझाव दिया था।



अटकाने, भटकाने और लटकाने वाली है ठाकरे सरकार- शेलार



कांजुरमार्ग की जमीन को लेकर केंद्र सरकार का दावा सामने आने के बाद विपक्षी दल भाजपा आक्रामक हो गई है। पूर्व मंत्री व भाजपा विधायक आशीष शेलार ने उद्धव पर हमला बोला कि यह अटकाने, भटकाने और लटकाने वाली है। उद्धव ठाकरे एक अहंकारी राजा की तरह महाराष्ट्र को चला रहे हैं और उनके बेटे विलासी पुत्र की तरह जीवन जी रहे हैं। इस सरकार से महाराष्ट्र की जनता को कोई भला नहीं होने वाला है।



राज्य की जमीन पर महाराष्ट्र का पहला अधिकार- सुप्रिया सुले



एनसीपी सुप्रीमो की पुत्री व सांसद सुप्रिया सुले ने डीपीआईआईटी के पत्र पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून में राज्य की जमीन पर पहला अधिकार राज्य सरकार का होता है। केंद्र सरकार महाराष्ट्र के विकास कार्यों में हस्तक्षेप कर रही है जो राज्य के अधिकार का हनन है। केंद्र सरकार संघ राज्य की बात करती है लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे देश में अघोषित आपातकाल है।



सार



केंद्र सरकार ने कारशेड की जमीन पर अपना दावा ठोक दिया है और उसपर अपना बोर्ड लगा दिया है। इससे ठाकरे सरकार मेट्रो कारशेड के मुद्दे पर घिरती नजर आ रही है…



विस्तार



मुंबई के पश्चिमी उपनगर स्थित आरे के जंगल से स्थानांतरित कर कांजुरमार्ग में मेट्रो रेल कारशेड बनाने की उद्धव ठाकरे सरकार की परियोजना पर ग्रहण लगता दिख रहा है। इसमें नया पेच यह है कि केंद्र सरकार ने कारशेड की जमीन पर अपना दावा ठोक दिया है और उसपर अपना बोर्ड लगा दिया है। इससे ठाकरे सरकार मेट्रो कारशेड के मुद्दे पर घिरती नजर आ रही है। वहीं, मेट्रो कारशेड को लेकर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार आमने-सामने आ गए हैं।



मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के फैसले को पलट कर कांजुरमार्ग में मेट्रो कारशेड बनाने की शुरुआत की है। राज्य सरकार कह रही है कि कारशेड के लिए जो जमीन उपलब्ध कराई जा रही है वह पूरी तरह से मुफ्त है। लेकिन अब पता चला है कि इस जमीन का मालिकाना हक केंद्र का है।



केंद्रीय उद्योग व आंतरिक व्यापार संवर्धन मंत्रालय (डीपीआईआईटी) ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव संजय कुमार को पत्र भेजकर कहा है कि यह नमक की जमीन है और इस पर अब भी मालिकाना हक भारत सरकार का है। इससे पहले मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने इस जमीन पर परियोजना के लिए प्रस्ताव भेजा था जिसे खारिज कर दिया गया था। अब यहां कारशेड बनाया जा रहा है जो गलत है।



ऐसे में सवाल उठता है कि बिना दस्तावेजों की जांच-पड़ताल किए ठाकरे सरकार ने मेट्रो कारशेड को आरे से उठाकर कांजुरमार्ग में शिफ्ट करने का फैसला कैसे कर लिया। जबकि उद्धव ठाकरे सरकार द्वारा मेट्रो कारशेड के स्थान परिवर्तन को लेकर गठित समिति ने भी आरे में ही कारशेड बनाने का सुझाव दिया था।



अटकाने, भटकाने और लटकाने वाली है ठाकरे सरकार- शेलार



कांजुरमार्ग की जमीन को लेकर केंद्र सरकार का दावा सामने आने के बाद विपक्षी दल भाजपा आक्रामक हो गई है। पूर्व मंत्री व भाजपा विधायक आशीष शेलार ने उद्धव पर हमला बोला कि यह अटकाने, भटकाने और लटकाने वाली है। उद्धव ठाकरे एक अहंकारी राजा की तरह महाराष्ट्र को चला रहे हैं और उनके बेटे विलासी पुत्र की तरह जीवन जी रहे हैं। इस सरकार से महाराष्ट्र की जनता को कोई भला नहीं होने वाला है।



राज्य की जमीन पर महाराष्ट्र का पहला अधिकार- सुप्रिया सुले



एनसीपी सुप्रीमो की पुत्री व सांसद सुप्रिया सुले ने डीपीआईआईटी के पत्र पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून में राज्य की जमीन पर पहला अधिकार राज्य सरकार का होता है। केंद्र सरकार महाराष्ट्र के विकास कार्यों में हस्तक्षेप कर रही है जो राज्य के अधिकार का हनन है। केंद्र सरकार संघ राज्य की बात करती है लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे देश में अघोषित आपातकाल है।







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