उद्धव ठाकरे-अजित पवार-भगत सिंह कोश्यारी (फाइल फोटो)

– फोटो : ANI (File)







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मराठा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार मुश्किल में हैं। मराठा संगठन लगातार आक्रामक हो रहे हैं, जिससे सरकार की परेशानी बढ़ती जा रही है। अब इससे उबरने के लिए सरकार के सामने मराठा आरक्षण को बचाने की कठिन चुनौती है। इसलिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वकीलो की फौज उतारने का फैसला किया है, जिससे मजबूती से अपना पक्ष कोर्ट में रख सके।



पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने मराठा समुदाय को शिक्षा व नौकरी में दिए गए आरक्षण पर रोक लगा दी है और मामले को संविधान पीठ के पास भेज दिया है। तब से इसको लेकर महाराष्ट्र में राजनीति गरमाई हुई है। वहीं, राज्य में दोबारा मराठा आंदोलन की सुगबुगाहट तेज होने लगी है।



आंदोलन शुरू होने से कोरोना और कंगना से लड़ रही शिवसेना के लिए घरेलू मोर्चे पर लड़ना कठिन हो जाएगा। इसलिए वह हर हाल में मराठा आरक्षण को बहाल कराना चाहती है। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट में 24 वकीलों की फौज उतारने का फैसला लिया है। इसमें से 5 वकील सरकार की ओर से नियुक्त किए गए हैं जबकि 19 वकील निजी तौर पर आरक्षण के समर्थन में दायर आवेदन पर पैरवी के लिए सरकार के ही पक्ष में खड़े होंगे। ताकि कानूनी मोर्चे पर सरकार की कोई कमजोरी न नजर आए।



इन वकीलों के जरिए मुकदमा लड़ेगी ठाकरे सरकार



सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, परमजीत सिंह पटवालिया, विशेष अधिवक्ता विजय सिंह थोरात, अधिवक्ता राहुल चिटणीस पैरवी कर रहे हैं। इसके अलावा मराठा आरक्षण के समर्थन में निजी तौर पर डाले गए हस्तक्षेप आवेदन पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, पीएस नरसिंहा, चंदर उदय सिंह, रफीक दादा, विनय नवरे, देवदत्त कामत, अधिवक्ता शिवाजी जाधव, सुधांशु चौधरी संजय खरडे पाटील, संदीप देशमुख, दिलीप तौर, अमोल सूर्यवंशी, प्रशांत केन्जले, कैलास औताडे, अमोल करंडे, श्रीराम पिंगले, जियो जोसेफ, स्नेहा अय्यर सहित अन्य वकील शामिल किए गए हैं।



सार



आंदोलन शुरू होने से कोरोना और कंगना से लड़ रही शिवसेना के लिए घरेलू मोर्चे पर लड़ना कठिन हो जाएगा। इसलिए वह हर हाल में मराठा आरक्षण को बहाल कराना चाहती है। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट में 24 वकीलों की फौज उतारने का फैसला लिया है। इसमें से 5 वकील सरकार की ओर से नियुक्त किए गए हैं…



विस्तार



मराठा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार मुश्किल में हैं। मराठा संगठन लगातार आक्रामक हो रहे हैं, जिससे सरकार की परेशानी बढ़ती जा रही है। अब इससे उबरने के लिए सरकार के सामने मराठा आरक्षण को बचाने की कठिन चुनौती है। इसलिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वकीलो की फौज उतारने का फैसला किया है, जिससे मजबूती से अपना पक्ष कोर्ट में रख सके।



पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने मराठा समुदाय को शिक्षा व नौकरी में दिए गए आरक्षण पर रोक लगा दी है और मामले को संविधान पीठ के पास भेज दिया है। तब से इसको लेकर महाराष्ट्र में राजनीति गरमाई हुई है। वहीं, राज्य में दोबारा मराठा आंदोलन की सुगबुगाहट तेज होने लगी है।



आंदोलन शुरू होने से कोरोना और कंगना से लड़ रही शिवसेना के लिए घरेलू मोर्चे पर लड़ना कठिन हो जाएगा। इसलिए वह हर हाल में मराठा आरक्षण को बहाल कराना चाहती है। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट में 24 वकीलों की फौज उतारने का फैसला लिया है। इसमें से 5 वकील सरकार की ओर से नियुक्त किए गए हैं जबकि 19 वकील निजी तौर पर आरक्षण के समर्थन में दायर आवेदन पर पैरवी के लिए सरकार के ही पक्ष में खड़े होंगे। ताकि कानूनी मोर्चे पर सरकार की कोई कमजोरी न नजर आए।



इन वकीलों के जरिए मुकदमा लड़ेगी ठाकरे सरकार



सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, परमजीत सिंह पटवालिया, विशेष अधिवक्ता विजय सिंह थोरात, अधिवक्ता राहुल चिटणीस पैरवी कर रहे हैं। इसके अलावा मराठा आरक्षण के समर्थन में निजी तौर पर डाले गए हस्तक्षेप आवेदन पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, पीएस नरसिंहा, चंदर उदय सिंह, रफीक दादा, विनय नवरे, देवदत्त कामत, अधिवक्ता शिवाजी जाधव, सुधांशु चौधरी संजय खरडे पाटील, संदीप देशमुख, दिलीप तौर, अमोल सूर्यवंशी, प्रशांत केन्जले, कैलास औताडे, अमोल करंडे, श्रीराम पिंगले, जियो जोसेफ, स्नेहा अय्यर सहित अन्य वकील शामिल किए गए हैं।







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