प्रकाश आंबेडकर (फाइल फोटो)
– फोटो : AmarUjala
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मुंबई के इंदु मिल परिसर में भारतरत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक निर्माण में अब एक नया पेच आ गया है। डॉ. आंबेडकर के पोते वंचित विकास आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने स्मारक बनाने की योजना पर ही सवाल उठाया है। वह नहीं चाहते कि वहां स्मारक बने। प्रकाश आंबेडकर की इच्छा है कि स्मारक की जगह अंतरराष्ट्रीय स्तर का रिसर्च सेंटर बनाया जाना चाहिए।
डॉ. आंबेडकर स्मारक का मुद्दा न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि देश की दलित राजनीति का अहम हिस्सा रहा है। इसलिए कांग्रेसनीत यूपीए हो या भाजपानीत एनडीए सरकार। सभी ने स्मारक को अहमियत दी है। सबसे पहले कांग्रेस-एनसीपी की सरकार ने साल 2011 में इंदु मिल के पांच एकड़ जमीन पर डॉ. आंबेडकर स्मारक बनाने की घोषणा की थी।
साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंदु मिल परिसर में डॉ. आंबेडकर स्मारक का भूमिपूजन किया था। तब से अभी तक स्मारक की नींव नहीं रखी जा सकी है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे स्मारक की संशोधित परिकल्पना के तहत चबूतरे और प्रतिमा का शिलान्यास करने वाले थे। लेकिन इस समारोह का निमंत्रण नहीं मिलने से आंबेडकर आंदोलन से जुड़े लोगों के अलावा विपक्ष ने नाराजगी जताई। वहीं, सत्ताधारी तीनों दलों के बीच में भी तालमेल नहीं बन पाया जिससे कार्यक्रम को टाल दिया गया। इसके बाद स्मारक को लेकर प्रकाश आंबेडकर फिर मुखर हुए हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी ने इंटरनेशनल स्कूल ऑफ स्टडीज के लिए दी थी जमीन
प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदु मिल परिसर में इंटरनेशनल स्कूल ऑफ स्टडीज सेंटर बनाने की मंजूरी दी थी। इसके लिए वाजपेयी ने एक फाइल पर नोट तैयार किया था। उसमें बाबासाहब के स्मारक का समावेश नहीं था। स्मारक बनाने का खेल राज्य की कांग्रेस सरकार में खेला गया था। इसलिए मुख्यमंत्री ठाकरे को कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं का कहना मानने की बजाए मंत्रालय से वाजपेयी की फाइल का नोट मंगाकर पढ़ना चाहिए। इसके बादरिसर्च-सेंटर बनाने का फैसला करें।
स्मारक की निधि कोरोना से निपटने में खर्च करे सरकार
प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि मेरा स्मारक बनाने को लेकर विरोध है। मैं छह साल से यही बात कह रहा हूं। मैं अपनी भूमिका पर कायम हूं। सरकार स्मारक की निधि का इस्तेमाल कोरोना महामारी से निपटने में इस्तेमाल करे। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अक्टूबर 2015 में स्मारक के भूमिपूजन के लिए आए थे, तब भी हमनें स्मारक बनाने का विरोध किया था। मैंने तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा था कि क्या वाजपेयी के नोट के अनुसार यहां पर काम किया जा रहा है।
स्मारक के निर्माण के लिए 1089.95 करोड़ रुपये होंगे खर्च
डॉ. आंबेडकर स्मारक का भूमिपूजन हुए पांच साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन स्मारक की नींव नहीं रखी जा सकी है। अलबत्ता स्मारक निर्माण में का खर्च बढ़ गया है। अब इसमें 1089.95 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है।
सार
इंदू मिल में स्मारक की जगह इंटरनेश्नल स्टडी सेंटर बनाने की मांग
विस्तार
मुंबई के इंदु मिल परिसर में भारतरत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक निर्माण में अब एक नया पेच आ गया है। डॉ. आंबेडकर के पोते वंचित विकास आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने स्मारक बनाने की योजना पर ही सवाल उठाया है। वह नहीं चाहते कि वहां स्मारक बने। प्रकाश आंबेडकर की इच्छा है कि स्मारक की जगह अंतरराष्ट्रीय स्तर का रिसर्च सेंटर बनाया जाना चाहिए।
डॉ. आंबेडकर स्मारक का मुद्दा न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि देश की दलित राजनीति का अहम हिस्सा रहा है। इसलिए कांग्रेसनीत यूपीए हो या भाजपानीत एनडीए सरकार। सभी ने स्मारक को अहमियत दी है। सबसे पहले कांग्रेस-एनसीपी की सरकार ने साल 2011 में इंदु मिल के पांच एकड़ जमीन पर डॉ. आंबेडकर स्मारक बनाने की घोषणा की थी।
साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंदु मिल परिसर में डॉ. आंबेडकर स्मारक का भूमिपूजन किया था। तब से अभी तक स्मारक की नींव नहीं रखी जा सकी है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे स्मारक की संशोधित परिकल्पना के तहत चबूतरे और प्रतिमा का शिलान्यास करने वाले थे। लेकिन इस समारोह का निमंत्रण नहीं मिलने से आंबेडकर आंदोलन से जुड़े लोगों के अलावा विपक्ष ने नाराजगी जताई। वहीं, सत्ताधारी तीनों दलों के बीच में भी तालमेल नहीं बन पाया जिससे कार्यक्रम को टाल दिया गया। इसके बाद स्मारक को लेकर प्रकाश आंबेडकर फिर मुखर हुए हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी ने इंटरनेशनल स्कूल ऑफ स्टडीज के लिए दी थी जमीन
प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदु मिल परिसर में इंटरनेशनल स्कूल ऑफ स्टडीज सेंटर बनाने की मंजूरी दी थी। इसके लिए वाजपेयी ने एक फाइल पर नोट तैयार किया था। उसमें बाबासाहब के स्मारक का समावेश नहीं था। स्मारक बनाने का खेल राज्य की कांग्रेस सरकार में खेला गया था। इसलिए मुख्यमंत्री ठाकरे को कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं का कहना मानने की बजाए मंत्रालय से वाजपेयी की फाइल का नोट मंगाकर पढ़ना चाहिए। इसके बादरिसर्च-सेंटर बनाने का फैसला करें।
स्मारक की निधि कोरोना से निपटने में खर्च करे सरकार
प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि मेरा स्मारक बनाने को लेकर विरोध है। मैं छह साल से यही बात कह रहा हूं। मैं अपनी भूमिका पर कायम हूं। सरकार स्मारक की निधि का इस्तेमाल कोरोना महामारी से निपटने में इस्तेमाल करे। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अक्टूबर 2015 में स्मारक के भूमिपूजन के लिए आए थे, तब भी हमनें स्मारक बनाने का विरोध किया था। मैंने तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा था कि क्या वाजपेयी के नोट के अनुसार यहां पर काम किया जा रहा है।
स्मारक के निर्माण के लिए 1089.95 करोड़ रुपये होंगे खर्च
डॉ. आंबेडकर स्मारक का भूमिपूजन हुए पांच साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन स्मारक की नींव नहीं रखी जा सकी है। अलबत्ता स्मारक निर्माण में का खर्च बढ़ गया है। अब इसमें 1089.95 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है।
via Growth News https://growthnews.in/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a4%88%e0%a4%83-%e0%a4%a1%e0%a5%89-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be/